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पांच गांव चकबन्दी मामले की सुनवाई 14.01.2019 को होगी

करनाल। चकबंदी का दंश झेल रहे चकबन्दी पीडि़त किसानों को सरकार ने थोड़ी सी राहत देते हुए कब्जा कार्यवाही 27.10.2019 तक रोक लगा दी है और अब यह मामला डी.आर.ओ. करनाल के पास पहुंच गया है। अब इस मामले की सुनवाई डी.आर.ओ. साहब राजबीर सिंह धीमान करेंगे।  डी.आर.ओ. करनाल ने अब इस मामले में 14 जनवरी लगाई है। दिनांक 14 को पीडि़त पांच गांव कालरम्, अराईपुरा, भरतपुर, लालुपरा और अमृतपुर कलां से भारी संख्या में किसान करनाल पहुंचेेंगे। पीडि़त किसानों ने कहा है कि जब तक पुरे मामले की गहनता से जांच नहीं की जाती या तब तब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं होता तब तक चकबन्दी पीडि़त किसान चैन से नहीं बैठेंगे। पीडि़त किसानों ने कहा है कि कब्जा कार्यवाही तो दूर की बात है हम अपनी खरीदी हुई जमीन को किसी को भी छूने नहीं देंगे क्योंकि यह जमीन हमारे पुर्वजों ने बड़ी मेहनत करके 1938-39 में खरीदी थी। उस समय यह जमीन उबड खाबड़ और जंगल की स्थिति में थी। हमारे पूर्वजों ने इस जमीन में कड़ी मेहनत करके जमीन को उपजाउ बनाया और जिन भूमाफिया किसानों से हमारे बुजुर्गों ने यह जमीन खरीदी थी आज वे ही बेईमान बने हुए हैं और चकबंदी अधिकारियों की मिलीभगत से पीडि़त किसानों की जमीन हड़पने का काम कर रहे हैं। इस जमीन की पहली बार चकबन्दी 1965 में हुई थी। उस समय पीडित किसानों की खरीदी हुई जमीन पुरी की पूरी वापिस किसानों को सौंप दी गई थी। लेकिन कुछ भूमाफियों ने मिलकर इस चकबंदी को बीच में ही रूकवा दिया और उसके बाद यह चकबन्दी 1965 में हुई। 1965 की हुई चकबन्दी में पीडि़त किसानों को उनकी जमीन से बेदखल कर दिया गया था। पीडि़त किसानों ने सी.एम. व डी.सी. साहब करनाल से मांग की है कि पीडि़त किसानों की आवाज सुने और सच्चाई का साथ देकर पूरे मामले की सी.बी.आई. जांच करवाए। तब सारी सच्चाई सामने आ जाएगी कि कौन सच्चा व कौन झूठा है। किसानों ने कहा है कि जो अधिकारी ए.सी.ओ. पटवारी करनाल में लगे हुए है वे सब भूमाफियों के साथ मिले हुए है और चकबंदी मामले में पूरा पैसा लुटने का काम कर रहे है। किसानों ने कहा है कि किसी भी ए.सी.ओ. पटवारी की डयूटी करनाल से बाहर कितनी भी दूर क्यों ना हो लेकिन वह सब रहते करनाल में ही है। किसानों ने कहा पीडि़त किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है इन ए.सी.ओ. व पटवारी की शिकायत किससे व कहां करें। पांच गांव की चकबंदी का सारा खेल इन भ्रष्ट अधिकारियों ने खराब कर रखा है। पीडि़त पांच गांव के किसानों के पास इस अपनी खरीदी हुई जमीन के पूरे कागजात इन्तकाल जमाबंंदी होने के बावजूद भी इन हमारे कागजों को देखने वाला नहीं है। अगर यह चकबन्दी 1995 में सही ईमानदारी से होती तो आज ये इतना बड़ा झगड़ा इस जमीन में ना होता। पीडि़त किसान ने कहा है कि दलबीर ए.सी.ओ. पर कितने केस लगे हुए है वाड्रा काण्ड, गुडग़ांव में 2 एफ.आई.आर. दर्ज हो चुकी है तथा करनाल की चकबन्दी में इसका पहला नाम है और 1995 से लेकर अब तक  इस भ्रष्ट ए.सी.ओ. की बदली नहीं हुई है और दोबारा इस भ्रष्ट ए.सी.ओ. को करनाल के गांव कैरवाली में लगाया गया है। पीडि़त किसानों ने कहा है कि यदि 14 तारीख से पहले इन भ्रष्ट ए.सी.ओ. दलबीर व पटवारियों की बदली करनाल से बाहर नहीं की गई और ये ए.सी.ओ., डी.आर.ओ की कोर्ट में पेश हुआ तो इसके खिलाफ चकबंदी पीडि़त पांच गांव के हजारों किसान, महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे इसका पूरा विरोध करेंगे, जोरदार प्रदर्शन करेंगे। पीडि़त किसानों की मांग है कि इसकी तुरंत बदली की जाए। कब्जा कार्यवाही पर रोक लगाई जाए। इस मामले की सी.बी.आई. से जांच करवाई जाए। इस पूरे मामले की कमेटी के अध्यक्ष व चकबंदी संयोजक प्रदीप कालरम ने कहा है कि सरकार गरीब पीडि़त किसानों की सुनवाई ना करके भूमाफियों की सुनवाई कर रही है। प्रदीप कालरम ने कहा है कि पीडि़त पांच गांव के किसान सरकार के साथ खड़े हैं। विधायक के साथ खड़े हैं जबकि भूमाफिया कटर कांग्रेसी है। इसके बावजूद भी सरकार भूमाफिये का साथ दे रही है। पीडि़त किसानों ने कहा है कि चकबंदी अधिकारी व करनाल प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम दिया है कि पांच गांव में कब्जा कार्यवाही को लेकर अफरा तफरी ना मचाएं। इन पांच गांव में शान्ति का माहौल रहने दे अन्यथा इसका परिणाम बुरा होगा। चकबंदी पीडि़त पांच गांव के किसान 27 तारीख को लेकर पूरी तरह तैयार है। अगर 27 तारीख को किसी प्रकार की कोई घटना घटती है या किसी पीडि़त किसान महिला ने अपने खाली पड़े खेतों में आत्मदाह कर लिया तो उसकी सारी जिम्मेदारी चकबन्दी अधिकारी व करनाल प्रशासन की होगी।
पीडि़त किसानों की तीन मांग है कि
1. जो चकबंदी मामले की इन्कवारी विजिलैंस में गई उस पर तुरंत कार्यवाही की जाए।
2. इस पूरे चकबन्दी मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए।
3. भ्रष्ट दलबीर ए.सी.ओ. व पटवारियों को तुरंत करनाल से बाहर किया जाए। आज चकबंदी पीडि़त पांच गांव के किसान किसी केस के मामले में करनाल आए हुए थे।

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