करनाल। राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान में गुरुवार को तीन दिवसीय ग्लोबल एलुमनी साइंटिफिक मीट का सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस शिखर सम्मेलन में विविध क्षेत्रों में कार्यरत संस्थान के पूर्व विद्यार्थियों, प्रबुद्ध डेरी उद्यमियों, बिजनेस लीडरों सहित करीब 500 प्रतिभागियों ने भाग लिया और अपने अनुभवों को विद्यार्थियों के साझा किया। उन्होंने संस्थान में उद्यमिता और स्टार्ट अप इकोसिस्टम बनाने को लेकर भी मंथन किया। इसमें पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान (दुवासू) मथुरा के पूर्व कुलपति डॉ. एमएल मदान, बीयूएटी, बांदा के पूर्व कुलपति डॉ. एसएल गोस्वामी, इंडियन डेयरी एसोसिएशन (आईडीए) के अध्यक्ष डॉ. जीएस राजोरहियाए, एनडीआरआई के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. जीआर पाटिल, मेट्रो डेयरी लिमिटेड कोलकाता के महाप्रबंधक डॉ. असितवा सुर, दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के उपाध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता, ग्लोबल डेयरी एप्लीकेशन मैनेजर न्यूजीलैंड से डॉ. अनिल काव, यूएस पेटेंट कार्यालय से डॉ. एस सिंह और डेलमोस रिसर्च प्राईवेट लिमिटेड गुडग़ांव के निदेशक,बब्बर सिंह ने भविष्य के अवसरों की कल्पना करने और सफलता के मार्ग को आगे बढ़ाने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
इन विचार-विमर्शों से यह सामने आया कि जैसे-जैसे भारत में डेरी प्रसंस्करण क्षेत्र 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, वैसे वैसे ही रोजगार और उद्यमशीलता के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। पशुपालन और डेरी प्रसंस्करण के अलावा, विश्लेषणात्मक परीक्षण सेवाएं, फ़ीड और चारा प्रबंधन, डेरी उपकरण निर्माण, डेरी पैकेजिंग, नए उत्पाद विकास, नियामक निकायों में कोल्ड चेन प्रबंधन में काफी अवसर उपलब्ध हैं।
विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों का दृड़ता से सामना करने के लिए तैयार करने के लिए डेरी टेक्नोलॉजी के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाना चाहिए तथा उसमें प्रबंधन, बौद्धिक संपदा अधिकार, वित्तीय प्रबंधन, गुणवत्ता प्रमाणपत्र आदि से संबंधित पाठ्यक्रमों को जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए टेक्नोलोजी बिजनेस इंकूबेसन सेंटर खोले जाने चाहिए और नए उद्यमियों को सलाह देने के लिए सेवानिवृत्त डेरी पेशेवरों की सेवाएं ली जा सकती हैं।
एनडीआरआई के निदेशक आरआरबी सिंह ने कहा कि हमारे पूर्व छात्र दुनियाभर के डेरी साइंस एजुकेशन संस्थानों के बीच अपने संस्थान को ओर अधिक बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के साइंटिफिक मीट उद्यमियों, कृषि-डेरी सहायता प्रणाली के निर्माताओं, वित्तीय और अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए संभावित ग्राहक समूहों के साथ जुडऩे और एक बेहतर नेटवर्क विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।
आयोजन सचिव डॉ. गौतम कौल ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना (एनएएचईपी) के लिए आईसीएआर के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होने एनडीआरआई डेरी स्नातकों को पर्याप्त अवसर प्रदान किए हैं।
पोस्टर सेशन में इन्हें मिला प्रथम पुरस्कार
एनीमल प्रोडक्शन एंड हीट, प्रोडक्ट एवं प्रोसेस डवल्पमेंट, फूड क्वालिटी एंड सेफ्टी तथा बायो टेक्नोलॉजिकल अप्रोचजिज फॉर इंप्रूविंग दि क्वालिटी एंड प्रोडक्टिविटी विषय पर एक पोस्टर सेशन भी आयोजित किया गया। इसमें स्नातकोत्तर श्रेणी की छात्रा तरुणप्रीत कौर, हरिशा बोडेमाला, सोनिया रणवीर और दीप्ति मित्तल को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया।
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