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कथाओं की सार्थकता तभी, जब जीवन में हों आत्मसात : द्विवेदी

कुरुक्षेत्र, 8 अप्रैल: मां मोक्षदायिनी गंगाधाम ट्रस्ट ऋषिकेश-हरिद्वार के सांस्कृतिक संगठन सनातन मिशन द्वारा धर्मनगरी के थीम पार्क में आयोजित 84वें 108 कुंडीय जनकल्याण शिवशक्ति महायज्ञ के तीसरे दिन बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्घालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा करके आशीर्वाद लिया। जानकारी देते हुए सनातन मिशन के अध्यक्ष आशुतोष गोस्वामी ने बताया कि यह अनुष्ठान सरंक्षक हरिओम महाराज एवं महामंडलेश्वर विश्वेश्वरानंद गिरि के सान्निध्य में कराया जा रहा है। यज्ञ के यजमानों सुरेंद्र अहलावत एवं शिवकुमार बठिंडा आदि ने देव पूजन में हिस्सा लिया। स्वामी हरिओम ने यज्ञ की महिमा बताते हुए कहा कि यज्ञ से पुत्र-पौत्रादि की प्राप्ति होती है। यज्ञ से ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष मिलते हैं और यज्ञ से ही पर्यावरण की रक्षा व जलवायु शुद्ध होती है। भारतीय जनमानस में यज्ञ की प्रधानता कही गई है। इसलिए जहां कहीं भी यज्ञ अनुष्ठान का आयोजन हो वहां अवश्य जाना चाहिए। वहीं, यज्ञ के बाद श्रीराम कथा में आचार्य देवेंद्र द्विवेदी (वृंदावन) ने माता सती प्रसंग, दक्ष यज्ञ विध्वंस और 52 शक्तिपीठों का उल्लेख किया। प्रवचनों में उन्होंने कहा कि कथाएं, यज्ञ और सत्संग की सफलता तभी होती है जब श्रोता इन कथाओं की शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करें।

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