कुरुक्षेत्र, 25 जनवरी। हरियाणा राज्य का पाण्डुलिपि संसाधन व संरक्षण केन्द्र कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू केन्द्रीय पुस्तकालय के उपरी तल पर पंड़ित स्थाणुदत्त नाम से संचालित है।
यह केन्द्र संस्कृत विभाग के प्रो. सुरेन्द्र मोहन मिश्र के निर्देशन में कार्य कर रहा है। कार्यशाला के निदेशक डाॅ. सुरेन्द्र मोहन मिश्र ने बताया कि केन्द्र में 12 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन 17 जनवरी से 29 जनवरी के बीच आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. कैलाश चन्द्र शर्मा ने किया। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में दिल्ली से आए डाॅ. उदय काकरू, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार जोशी, व पूर्व कुलपति प्रो. सच्चिदानन्द जोशी उपस्थित हुए। भारतीय प्राचीन ज्ञान-विज्ञान जो लगभग डेढ़ करोड़ पाण्डुलिपि ग्रन्थों से भरा पड़ा है। उन्हें आधुनिक ज्ञान की मुख्य धारा में लाकर लोकहित व राष्ट्र हितैषी कार्य योजनाओं में शामिल करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने पाण्डुलिपियों को पढ़ने व समझने के लिए अनेक वर्षों से पाण्डुलिपि संसाधन केन्द्र प्रत्येक राज्य में स्थापित कर उस राज्य के देवालयों व विद्वान घरानों के घरों से इकट्ठे करके उन पाण्डुलिपियों की जीर्णता का वैज्ञानिक विधि से सुधार कर संरक्षित कर सूचीबद्ध करके उनका अध्ययन करवाया जा रहा है।
कार्यशाला में शारदा लिपि और ब्राह्मी लिपि के प्रशिक्षण कश्मीर के डाॅ. शशि शेखर तोशखानी, जम्मू विश्वविद्यालय की डाॅ. सुषमा देवी गुप्ता तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र नई दिल्ली से डाॅ. कीर्ति कान्त शर्मा आदि प्रसिद्ध लिपि वैज्ञानिकों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिसमें देश के 12 राज्यों से स्काॅलर प्रतिभागी विद्वान भाग लेकर उक्त लिपियों को वैज्ञानिक विधि से सीख रहे हैं। जम्मू से विवेक खजूरिया तथा कश्मीर से नीलम ने भी शारदा लिपि का प्रतिभागियों को अभ्यास करवाया।
कार्यशाला में शैक्षिक सहयोग मिलेनियम इंडिया एजुकेशन फाउंडेशन दे रहा है। प्रायोजक राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार हैं। अनेक स्थानीय संस्थान भी शामिल हैं। इसमें कार्यशाला में प्रसिद्ध विद्वान डाॅ. संगीता वेदालंकार, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार, डाॅ. एसके बाजपेयी लखनउ विश्वविद्यालय, प्रो. एमिरट्स डाॅ. असमेश्वर झा तथा विभिन्न संस्कृत संस्थानों के संस्थापक विद्वान सहित 12 राज्यों के विशिष्ट विद्वान इसमें भाग ले रहे हैं।
केन्द्र के निदेशक ने बताया कि प्रतिदिन 11 बजकर 30 मिनट से सांय 5 बजे तक निरन्तर प्रशिक्षण कक्षाएं लगाई जाती हैं।
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