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रायतखाना की राजकीय प्राथमिक पाठशाला गांव के सभी लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन गयी है।

इन्द्री/करनाल 12 जनवरी,  कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ,लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती। हरिवंश राय बच्चन द्वारा दिए विचार को जमीन पर मूर्त रूप देते हुए करनाल से लगभग 35 किलोमीटर दूर भादसो लाडवा रोड पर रायतखाना की राजकीय प्राथमिक पाठशाला गांव के सभी लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन गयी है। दो वर्ष पहले जिस पाठशाला में बच्चे भी बुझे मन से प्रवेश करते थे, अब वहां हर रोज   बच्चे आते हैं, शिक्षा ग्र्रहण करने के साथ-साथ खेल-कूद से वातावरण मानों संजीव हो उठा है।
रायतखाना की पाठशाला अब शिक्षा विभाग की योजना, ग्राम पंचायत के सहयोग व अध्यापकों की दिन-रात की मेहनत से आसपास के स्कूलों व ग्राम पंचायतों के लिए नजीर बन गयी है। दो वर्ष पहले जिस पाठशाला में कांग्रेस घास का साम्राज्य स्थापित था और वनस्पति के नाम पर धूल बच्चों व अध्यापकों को दिनभर स्नान करवाती रहती थी, आज वहां सुन्दर क्यारियों में लगे फूल-पौधे सबके मन को हर्षा रहे हैं। शिक्षा विभाग से मिले अनुदान से स्कूल भवन जो जर्जर हालात में था, की मरम्मत करवाकर नई शक्ल में बच्चों का स्वागत करता है। बच्चे पहले कच्ची व ऊबड-खाबड जगह पर सुबह की सभा में खडे होकर प्रार्थना करते व अध्यापकों द्वारा दैनिक जीवन पर दिए जाने विचारों को असहज होकर सुनते थे, अब उसकी जंगह वे पक्के व साफ-सुधरे स्थान पर बैठकर सुबह की सभा को बडे चाव और आत्मीयता के साथ अंजाम देते है। स्कूल का गेट भी आने जाने वालों को आकर्षित करता है। स्कूल के कमरों व बरामदों में बने चित्र तथा लिखी गई इबारतें बच्चों को टकटकी लगाकर देखने-पढऩे के लिए विवश कर देतीं हैं। पहले पीने के पानी की अस्थाई व्यवस्था के चलते बच्चे पानी पीने के साथ ही कपड़े भी गीले कर लिया करते और पर्याप्त नल नहीं होने की वजह से झीनाझप्ट्टी करते थे, अब उसकी जगह बच्चों की संख्या और कद के लिहाज से टुंटियों का प्रबंध हो जाने के बाद बच्चे आरामदायक स्थिति में खडे होकर जल ग्रहण करते हैं और कपड़े भी गीले नहीं होते। अध्यापकों ने आपसी सहयोग व मनरेगा योजना से स्कूल के ग्राउंड को समतल करके ग्राउंड के चारों और गली का निर्माण करवा दिया गया और गली के दोनों तरफ छायादार, सजावटी,फलदार व औषधियां पौधे ग्राम पंचायत की मदद से रोप दिए। मैदान में बच्चों के लिए बने खो-खो,कबड्डी, बैडमिंटन का ग्राउंड तथा लगे झूले बच्चों के शारीरिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
 स्कूल के शौचालयों की मरम्मत व रंग-रोगन के बाद उनमें पानी की व्यवस्था अब 24 घंटे रहती है। जहां पहले स्कूल की छुट्टी के बाद शौचालयों पर ताले लटक जाते थे, अब उन पर कभी ताला नहीं लगता। स्कूल के एक कमरे में पुस्तकालय विकसित किया है, जिसमें ज्ञानवर्धक पुस्तकें लेकर आरामदायक बैंचों पर बैठकर पढते और अपने भविष्य के सपनों की दुनिया से रूबरू होते। अब स्कूल में बच्चे कम्प्यूटर की सहायता से विषयों को आसानी से समझने लगे हैं। सुविधाओं के बढने से स्कूल के शैक्षणिक वातावरण पर सकरात्मक प्रभाव साफ-साफ नजर आने लगा है। पाठशाला में पहले जहां बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही थी, वहीं अब बच्चों की संख्या में बढोतरी जारी है। स्कूल के शैक्षणिक ,भौतिक व सामाजिक बदलाव लाने में मुख्य शिक्षक देवेन्द्र सिंह, सुरेश प्रजापति, जसवंत बांकुरा की टीम ने ग्राम पंचायत, खंड विकास एवं पंचायत विभाग, आमजन व खंड के सामाजिक कार्यकर्ता महिन्द्र कुमार, मान सिंह चन्देल, सबरेज अहमद का सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त कर असम्भव को सम्भव कर दिखलाया ।

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