करनाल, 30 अप्रैल: विश्व स्वास्थ्य संगठन की अगुआई में टीकाकरण से सबको सुरक्षित करें के विषय पर इस वर्ष के विश्व टीकाकरण सप्ताह का आयोजन पूरे विश्व भर में 24-30 अप्रैल 2019 के दौरान किया गया। इसी उपलक्ष्य में 30 अप्रैल 2019 को कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज, करनाल के बालरोग ओपीडी ब्लॉक में संस्थान की जन स्वास्थ्य जागरूकता मुहिम की अगली कड़ी में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ सुरेन्द्र कश्यप ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बताया कि हर वर्ष विश्व भर में टीकाकरण की वजह से लाखों बच्चों को बीमार होने से और उनकी जिन्दगी को बचाया जाता है। पिछले कुछ वर्षों विश्व भर में छोटे बच्चों की बीमारियाँ खासकर खसरा और डिप्थेरिया (गलघोंटू) अब पांच वर्ष से ज्यादा उम्र के बच्चों में भी देखने को मिल रही हैं। इसी वजह से इन बड़े बच्चों में भी टीकाकरण की महत्ता और भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि विश्व टीकाकरण सप्ताह जैसी जन स्वास्थ्य जागरूकता मुहिम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को जागरूक कर सभी उम्र के लोगों में टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करना है।
कम्युनिटी मेडिसन के एसोसिएट प्रोफेसर और जन स्वास्थ्य जागरूकता के नोडल अधिकारी डॉ राजेश गर्ग ने इस कार्यक्रम का संचालन करते हुए जानकारी दी कि टीकाकरण को पूरे विश्व में एक बहुत ही बेहतरीन और कामयाब रणनीति के तौर पर जाना जाता है। स्माल पॉक्स (बड़ी माता) की बीमारी को पूरी दुनिया से टीकाकरण की वजह से ही समूल नष्ट किया जा सका है। पिछले आठ सालों से भारत में पोलियो का कोई भी नया केस नहीं मिला है जिसका श्रेय टीकाकरण मुहिम को ही जाता है। उन्होंने बताया कि देश भर में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए कई तरह के टीके मुफ्त लगाये जा रहे हैं। एक साल से छोटे बच्चों में निमोनिया से बचाव करने वाले महंगे टीके न्यूमोकोकल वैक्सीन (पीसीवी) और दस्त से बचाव के लिए रोटा वायरस वैक्सीन को भी अब हरियाणा के टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर लिया गया है। अभी तक ये दोनों वैक्सीन सिर्फ निजी क्षेत्र में उपलब्ध थी और काफी महंगी थी पर अब ये दोनों वैक्सीन हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में बिलकुल मुफ्त उपलब्ध है।
बालरोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ पूनम मारवाह ने टीकाकरण के बारे में आम जनता को जानकारी दी। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे -4 (2015-16) के अनुसार भारत में अभी भी करीब दस में से सात बच्चों का टीकाकरण हो पाया था। डॉ पूनम ने बताया कि भारत सरकार के मिशन इन्द्रधनुष की वजह से वर्ष 2015-16 के बाद टीकाकरण के कवरेज में काफी अच्छी वृद्धि हुई है। उन्होंने पोलियो, निमोनिया, तपेदिक, दिमागी बुखार, जापानी बुखार, खसरा, रूबेला, काली खांसी, टेटनस, पीलिया, दस्त आदि बिमारियों के बारे में वहां मौजूद को लोगों बताया कि जिनके द्वारा टीकाकरण से बच्चों को बचाया जा सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत लगने वाले सभी टीके जैसे बी.सी.जी, डी.पी.टी, पेंटावेलेंट वैक्सीन, पोलियो, रोटा वैक्सीन, पी.सी.वी., हिब, हेपेटाइटिस बी, खसरा, जे.ई., आदि के बारे में जानकारी दी।
डॉ पूनम ने बीमार बच्चों या कम वजन पैदा हुए बच्चों के टीकाकरण के बारे में वहां मौजूद माताओं को जानकारी दी। उन्होंने कुछ बच्चों में टीकाकरण की वजह से होने वाले साधारण साइड इफेक्ट्स के बारे में जानकारी देते हुए वहां मौजूद महिलाओं के प्रश्नों का भी उत्तर दिया। उन्होंने उन अन्य टीकों पर भी प्रकाश डाला जो कि राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में नहीं लगाये जाते पर जिन्हें निजी अस्पतालों में लोग अपनी मर्जी से लगवा सकते हैं जैसे हेपेटाइटिस, टाइफाइड, चिकन पॉक्स (छोटी माता), फ्लू, गलसुआ (मम्प्स), मेनिनजाईटीस इत्यादि।
कम्युनिटी मेडिसन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ रमणिका अग्रवाल ने कहा कि माताओं को जो टीकाकरण कार्ड दिया जाता है उनमें बच्चों के वजन देखने का भी ग्रोथ चार्ट है जिससे माताएं खुद ये देख सकती हैं कि उनका बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से बढ़ रहा है या फिर कहीं कुपोषण का शिकार तो नहीं है। उन्होंने परिवार के लोगों को अपने बच्चों के टीकाकरण और विकास में जागरूक रहने की बात की। बालरोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ आशीष मारवाह इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में ने अहम् भूमिका निभाई। स्वाइन फ्लू के टीके के बारे में जानकारी देते हुए डॉ आशीष मारवाह ने कहा कि फ्लू का टीका हर किसी को लगवाने की जरुरत नहीं होती। सिर्फ खास परिस्थितियों जैसे 65 वर्ष से ज्यादा उम्र, दिल की बीमारी, दमा, शुगर के मरीजो इत्यादि में ही इसे लगवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फ्लू का टीका लगवाने से पहले अपने डाक्टर से संपर्क जरुर करें क्योंकि ये टीका करीब हर एक साल बाद बदल जाता है। संस्था के चिकित्सा अधीक्षक डॉ जगदीश दुरेजा ने कहा कि टीकाकरण से सम्बंधित किसी भी किस्म की भ्रान्ति से लोग बहकावे में ना आयें और अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में डाक्टर या स्वास्थ्य कार्यकर्ती से पूरी और सही जानकारी जरुर लें।
डॉ राजेश गर्ग ने कार्यक्रम के समापन में कहा कि भारत सरकार द्वारा 2014 में मिशन इन्द्रधनुष और 2017 में सघन मिशन इन्द्रधनुष चलाया गया ताकि टीकाकरण से छुटे बच्चों को इस मुहीम से जोडक़र उनका टीकाकरण पूरा किया जा सके। सरकार वर्ष 2020 तक 90 प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य हासिल करने के लिए कृतसंकल्प है और इसके लिए ना केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि समाज सेवी संस्थाओं, स्कूलों, धार्मिक संस्थाओं और आम जनता को भी आगे बढक़र इसके लिए पहले खुद जागरूक होना होगा और फिर दूसरों में जागरूकता फैलानी होगी। इस विषय पर लोगों को सार्वजानिक तौर पर चर्चा करनी चाहिये ताकि अधिक से अधिक लोग जागरूक हों।
कार्यक्रम में प्रोफेसर (डॉ) विजय खनगवाल, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ अशोक कुमार, संख्याकिविद डॉ हरप्रीत और राजेश कुमार, सुनील कुमार, ईश कुमार, नीलम रानी, और अन्य नर्सिंग स्टाफ आदि ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
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