करनाल 16 दिसम्बर। पूर्व केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री आई.डी. स्वामी का शहर के अर्जुन गेट स्थित शिवपुरी श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। आई.डी. स्वामी के पार्थिव शरीर को उनके पुत्र राजेन्द्र स्वामी ने मुखाग्रि दी। इस मौके पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल संग बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य व्यक्तियों तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि अंतिम यात्रा में शामिल हुए। इससे पूर्व मुख्यमंत्री करीब 11 बजे दिवंगत आई.डी. स्वामी के निवास स्थान पर पहुंचे और उन्होंने आई.डी. स्वामी के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन कर शोकाकुल परिवार के साथ दुख प्रकट किया और कहा कि आईडी स्वामी के निधन से समाज को एक बड़ी क्षति पहुंची है, जिसकी भरपाई करना नामुमकिन है। शवयात्रा शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री ने आई.डी. स्वामी की अर्थी को कन्धा भी दिया। उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गई थी तथा गमगीन थे।
इसके पश्चात मुख्यमंत्री रमेश चंद सैनी, प्रेमलता व सुरेश भंडारी के निधन पर शोक प्रकट किया। रमेश चंद सैनी कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे और अचानक चल बसे। वे अपने पीछे पत्नी रानी, एक बेटा व दो बेटियां छोड़ गए हैं। मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिवार के साथ दुख बांटते हुए कहा कि ईश्वर आपको दुख की इस घड़ी में हिम्मत दे और दिवंगत रमेश चंद सैनी को अपने चरणों में स्थान दे।
इसके पश्चात मुख्यमंत्री मनोहर लाल भाजपा नेता अशोक भंडारी के भाई के निधन पर उनके संतनगर स्थित आवास पर गए और शोक प्रकट किया। उन्होंने भंडारी परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर उन्हें सांत्वना दी। दिवंगत सुरेश भंडारी आरएसएस से लम्बे समय तक जुड़े रहे और अब बीमार होने के कारण चल बसे। वे अपने पीछे पत्नी सुदर्शन देवी, एक बेटा राजेश भंडारी तथा तीन बेटियां छोड़ गए हैं।
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विलक्षण प्रतिभा के धनी थे आईडी स्वामी
विलक्षण प्रतिभा के धनी आई.डी. स्वामी का जन्म 10 अगस्त 1929 को अम्बाला जिला के गांव मोहड़ा में हुआ था। उन्होंने गांव के स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ली और फिर कॉलेज की शिक्षा अम्बाला कैन्ट में ली। पंजाब यूनिवर्सिटी से एम.ए., एल.एल.बी. की। इसके बाद पंजाब सिविल सर्विस में सैलेक्ट हुए और सिटी मैजिस्ट्रेट तथा एसडीएम जैसे पदों पर रहे। पदोन्नति पाकर आई.ए.एस बने और सिरसा व हिसार में उपायुक्त के पद पर काम किया। सर्विस से रिटायर होने के बाद वर्ष 1990 में भाजपा ज्वाईन की और फिर 1996 में अपने प्रथम चुनाव में करनाल क्षेत्र से जीत कर सांसद बने, उन्होंने चुनाव में कांग्रेस के चिरंजी लाल शर्मा को पराजित किया। इसके बाद वर्ष 1996 में पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल से हार गए। फिर 1999 में चुनाव मे भजन लाल को रिकॉर्ड मतों से हरा कर विजयी रहे और उन्हें केन्द्र में गृह राज्य मंत्री का पद मिला। इसके बाद वे कांग्रेस के अरविंद शर्मा से हार गए। पिछले कई वर्षों से उम्र दराज होने के कारण वे राजनीतिक कार्यक्रमों से दूर थे।

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