कुरुक्षेत्र, 16 दिसम्बर। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के तत्वावधान में शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यशाला के छठे दिन विषय विशेषज्ञ द्वारा क्राफ्ट आधारित शिक्षा पर देशभर से आए शिक्षकों को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने कार्यशाला में आए विषय विशेषज्ञ का परिचय कराया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ललित कला विभाग के असिस्टैंट प्रोफेसर डॉ. आर.के. सिंह ने प्रशिक्षुओं को क्राफ्ट विषय की बारीकियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चों में किस प्रकार क्राफ्ट के प्रति रुचि बढ़ाई जाए, इसके लिए उन्होंने कला के विभिन्न पहलु प्रस्तुत किए। डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि कला दिल से निकलती है। क्राफ्ट में किसी चीज को हम बार-बार दोहराते हैं और उसमें हमारी अभिव्यक्ति भी नहीं होती, उसे एक तरह से क्राफ्ट की संज्ञा दी जा सकती है जैसे बनारस में बनने वाले लकड़ी के खिलौने, मुरादाबाद में बनने वाला मैटल का सामान और सहारनपुर में बनने वाली लकड़ी की वस्तुओं से हम क्राफ्ट की तुलना कर सकते हैं। आज के समय में स्कूल प्रारंभ करते समय बच्चों को क्राफ्ट से ही परिचय करवाते हैं जबकि पहले समय में ऐसा नहीं होता था। उन्होंने बताया कि समय-समय पर बच्चों के बीच इस विषय से संबंधित किसी विशेषज्ञ का उद्बोधन भी करवाना चाहिए। उन्होंने गुजरात की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को पी.पी.टी. के माध्यम से भी प्रस्तुत किया। इसी अवसर पर लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें केरल में दो प्रकार से सांस्कृतिक व शास्त्रीय नृत्य जिसमें मोहनी अट्टम तथा भारतनाट्यम प्रस्तुत किए जाते हैं जिसमें भगवान विष्णु के मोहनी रूप का वर्णन किया जाता है। कलामंडलम एवं कल्याण कुट्टीयम के रूप में प्रदर्शित किया जाता है जिसकी जड़ें भारतीय कला की जननी समझी जाने वाली पुस्तक नाट्य शास्त्र में है।
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